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महिला उत्थान के बेमिसाल चार साल- धामी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि: रुचि भट्ट

देहरादून। उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट ने राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कहा कि उत्तराखंड में बीते चार वर्षों के दौरान महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कार्य हुए हैं, जिन्हें “महिला उत्थान के बेमिसाल चार साल” के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं को केवल योजनाओं की लाभार्थी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाकर विकास की मुख्यधारा में अग्रणी भूमिका दी है।

रुचि भट्ट ने बताया कि राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप आज 5 लाख से अधिक महिलाएं विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इन समूहों को 500 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया है, जिससे महिलाओं की आय में औसतन 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए विशेष मंच विकसित किए गए हैं, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाओं को अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू की हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत लाखों गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी गई है, जबकि मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के माध्यम से नवजात शिशुओं और माताओं को आवश्यक पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य में मातृ मृत्यु दर में निरंतर कमी आई है, जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता का प्रमाण है। शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिला है और महिला साक्षरता दर में निरंतर वृद्धि हुई है, जो कई जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच चुकी है। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महिला हेल्पलाइन 1090 और गौरा शक्ति ऐप जैसी पहलें लागू की गई हैं, जिससे महिलाओं में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। रुचि भट्ट ने कहा कि रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में भी महिलाओं को व्यापक अवसर प्रदान किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत हजारों महिलाओं को ऋण और प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया है।

मिलेट्स (श्री अन्न), हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं, वहीं पर्यटन और होमस्टे योजनाओं में भी महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में महिलाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को सुदृढ़ किया गया है। पंचायतों और स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं नेतृत्वकारी भूमिकाओं में सामने आई हैं और ग्राम विकास से लेकर नीति निर्माण तक सक्रिय योगदान दे रही हैं।

रुचि भट्ट ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वय से महिलाओं के कल्याण से जुड़ी योजनाओं का प्रभाव और अधिक व्यापक हुआ है। उज्ज्वला योजना के तहत लाखों महिलाओं को गैस कनेक्शन, जन धन योजना के माध्यम से बैंकिंग सुविधाएं और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण से महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। अंत में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इन चार वर्षों के दौरान महिला सशक्तिकरण केवल एक नीतिगत लक्ष्य नहीं रहा, बल्कि यह जमीनी स्तर पर वास्तविक परिवर्तन के रूप में सामने आया है। आज प्रदेश की महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखंड महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।

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