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पश्चिमी यूपी की आठ सीटों से लोकसभा चुनाव का शुभारंभ, 2019 में पलट गया था 2014 वाला रिकॉर्ड

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत में 19 अप्रैल को मतदान होगा। माना जा रहा है कि यहां से जो रूझान मिलेंगे उनका असर देश-प्रदेश में दूर तक महसूस किया जाएगा। कयास इस बात पर लगाए जा रहे हैं कि रूझान 2014 जैसे रहते हैं या वेस्ट यूपी इस बार 2019 को दोहराएगा। 2014 में बना रिकॉर्ड 2019 में पलट गया था। नजर इस बात पर भी है कि इस बार के चुनाव में ध्रुर्वीकरण का असर होगा या जातीय समीकरण प्रभावी होंगे।

मतदान से ठीक पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना पट्टी का यह इलाका समृद्धशाली लेकिन संवेदनशील है। सहारनपुर मंडल जिसमें सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर और बिजनौर की आधी लोकसभा सीट आती है। वहां के लोगों के जेहन में अभी भी 27 अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर में एक बेटी के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले को लेकर हुए भीषण दंगे की टीस बनी हुई है, जिसमें दो जाट युवकों गौरव और सचिन एवं मुस्लिम युवक शाहनवाज की हत्या हो गई थी और उसके बाद उपजी हिंसा में 62 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे।

कैराना का पलायन का मुद्दा लोकसभा के 2014, 2019 के चुनावों और 2017 और 2022 के विधान सभा चुनावों में अन्य मुद्दों पर भारी साबित हुआ। हालांकि इसके बाद गंगा-यमुना में काफी पानी बह चुका है लेकिन इन दोनों नदियों के बीच के इस क्षेत्र के लोग उस स्थिति में लौटना नहीं चाहते हैं। शामली के छोटे किसान रामसिंह सैनी और थानाभवन क्षेत्र की बागवानी करने वाली महिला रीना कश्यप कहती हैं कि किसानों को सम्मान निधि की राशि मिल रही है।

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