महिला सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक कदम — आईटीसी मिशन सुनहरा कल के टीएचपी कार्यक्रम की दो लाभार्थी महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल
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महिला सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक कदम — आईटीसी मिशन सुनहरा कल के टीएचपी कार्यक्रम की दो लाभार्थी महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल
यह बताते हुए अत्यंत हर्ष का विषय है कि आईटीसी मिशन सुनहरा कल के टीएचपी (Targeting the Hardcore Poor) कार्यक्रम के अंतर्गत दो परिश्रमी एवं जुझारू महिलाएँ — श्रीमती पिंकी, धनलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की सदस्य, तथा श्रीमती रूबी, सरस्वती स्वयं सहायता समूह की सदस्य — आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रही हैं।
दोनों समूह श्रीराम ग्राम संगठन से संबद्ध हैं, जो आगे स्वागत साहित्य सहकारिता से जुड़ा हुआ है। वर्षों से ये महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपने परिवारों के आर्थिक उत्थान के लिए कार्यरत रही हैं। अब इनकी यह निरंतर साधना श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सहयोग से एक नई दिशा प्राप्त कर रही है।
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत दोनों महिलाओं को अल्ट्रा पुअर पैकेज के रूप में ₹35,000 प्रति महिला, अर्थात कुल ₹70,000 की राशि प्रदान की गई है। यह राशि उन्हें लघु उद्यम आरंभ करने एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से दी गई है। इस वित्तीय सहायता से श्रीमती पिंकी एवं श्रीमती रूबी अब स्वयं का छोटा व्यवसाय प्रारंभ कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने के मार्ग पर अग्रसर होंगी।
इस अवसर पर आयोजित एक सादे परंतु गरिमामय कार्यक्रम में स्वागत समूह की अध्यक्षा श्रीमती विमल जोशी ने दोनों महिलाओं को चेक के माध्यम से यह धनराशि प्रदान की। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिनिधियों ने दोनों लाभार्थियों के आत्मविश्वास एवं प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।
डॉ. पंत, आईटीसी मिशन सुनहरा कल के परियोजना प्रबंधक ने कहा कि —
“यह पहल न केवल आर्थिक सहायता का वितरण है, बल्कि यह उन महिलाओं में आत्मविश्वास का संचार है जो कभी समाज के हाशिए पर थीं। आज वे अपने श्रम और संकल्प से आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार कर रही हैं।”
श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम की ओर से यह भी बताया गया कि टीएचपी कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसी कई महिलाएँ धीरे-धीरे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उन्हें उद्यमिता प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और बाज़ार से जुड़ाव जैसे आवश्यक सहयोग भी प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने व्यवसाय को टिकाऊ बना सकें।
यह पहल वास्तव में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण पुनर्जागरण की दिशा में एक अनुकरणीय कदम है — जो इस तथ्य को पुष्ट करती है कि जब नारी को अवसर और मार्गदर्शन मिलता है, तो वह न केवल अपने जीवन को, बल्कि पूरे समाज को समृद्ध बना सकती है।



